चोरी भी करते हैं लेकिन शान से

यों तो चिट्ठों पर चर्चा के काबिल अधिक नहीं मिल पाता
आखिर कब तक रवि रतलामी, फ़ुरसतिया, समीर को गाता
कितने दिन आलोक पुराणिक या सागर की बात करूँ मैं
या दुहाई मेरे पन्ने की , बोलो कितनी देर लगाता

इसीलिये चर्चा का दामन छोड़ दिया कर एक बहाना
जितना पढ़ूँ लिखूंगा उतना, ये भी मुश्किल था कह पाना
किन्तु यहां पर जब देखी है सरे आम घनघोर डकैती
तो हो गया असंभव मुझको अब बिल्कुल भी, चुप रह जाना

तो मुलाहिजा फ़रमाइये

वह चोरी जब करते हैं, करते हैं सीना तान के

लिखना आता नहीं उन्हे है, हमने देखो मान लिया
और न तुकबन्दी ही सीखी, ये भी सच है जान लिया
भाव पास कुछ नही, चाह है शायर पर कहलाने की
इसीलिये ही राहजनी करवे करें उन्होंने ठान लिया

दूजों का हक हथियाते् हैं सदा बपौती मान के

चिट्ठों पर सोचा है कोई उनके जितना पढ़ा नहीं
वे लेखक हैं और कोई भी उनसे ज्यादा बड़ा नहीं
उनका हक है चाहे जिसकी रचना कह अपनी छापें
कोई उनके जितना ऐसे पैडस्टल पर चढ़ा नहीं

सारे शिष्टाचार पी गये ठंडाई में छान के

हर अच्छी कॄति इनकी होती और किसी का नाम नहीं
नीति और ईमान किसी से इनको कोई काम नहीं
ये है सच्छी बात पुतेगी गर्द समय की चेहरे पर
पंथ प्रगति का कभी चूमने पाता इनके पांव नहीं

बज़्मे अदब में, खरपतवारी पौधे हैं ये लान के

About bhaikush

attractive,having a good smile
यह प्रविष्टि Uncategorized में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

6 Responses to चोरी भी करते हैं लेकिन शान से

  1. अनूप शुक्ला कहते हैं:

    आपने अच्छा किया जो यह कहा! कहते रहिये!

  2. Udan Tashtari कहते हैं:

    आगाह करके संभलने का मौका तो देते भाई…वैसे ऐसी सब बातों को वो अपने ब्लॉग से मिटा देते हैं तो कैसे कोई आगाह भी करे. शायद भविष्य में संभलें.

  3. Basant Arya कहते हैं:

    मेरा तो मानना है कि कुछ भी नया नही है सब कुछ कहा जा चुका है. बस कहने का अन्दाज नया होता है.

  4. Rachna Singh कहते हैं:

    http://sarathi.info/archives/495http://hubpages.com/hub/Nai_Subahi have pointed it out so many times i am requesting every blogger to visit these pirated copied sites and keep posting comments the link in your post above does not work now

  5. Rachna Singh कहते हैं:

    कहने का अंदांज नया हो मौलिक हो तो उस पर अधिकार ओरिजनल लेखक का है अब वर्ण माला तो पुरानी ही है ले – ख़ाक हो रहा है लेखक

Rachna Singh को एक उत्तर दें जवाब रद्द करें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s