Monthly Archives: जुलाई 2007

कविता की रसधार में

बांझ कौन है ? कविता मान्या जी के भीतरी आक्रोश को उजागर करती कविता है ! इसमें कविता का महीनपन न होकर सवालों की स्थूलता ज्यादा है! यहां कविता का संवेदना संप्रेषण कविता की शैली पर हावी होता दिखाई दे … पढना जारी रखे

chitha charcha, chithacharcha, neelima में प्रकाशित किया गया | 1 टिप्पणी

दाग अच्‍छे हैं

हिंदी की चिट्ठाकारी में ‘जारी’ साधुवाद युग की ही तरह राष्‍ट्रपति भवन में ही ऐसा ही युग जारी था कलाम गए तो राहत की सांस ली गई। बिहारी बाबू और खुलासा कर बता रहे हैं- अब आप ही बताइए न … पढना जारी रखे

चिट्ठचर्चा, chitha charcha, chithacharcha, masijeevi में प्रकाशित किया गया | 1 टिप्पणी

काव्यचर्चा बनाम चिट्ठाचर्चा ..

कविताओ‍ से चाहे लोग जितेन्द्र जी की तरह भागे भागे फ़िरते हो‍ और भले ही समीर जी से बात करते हुए हमे पकड कर कविता सुना दिए जाने का डर लगता हो :)पर सत्य यह है कि कविता आज के … पढना जारी रखे

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एक अलिंकित चर्चा

महाशक्ति पर प्रमेन्द्र प्रताप सिंह लिखते हैं ” कुछ दिनों पूर्व देखने में आया था कि कुछ चिट्ठाकारों के द्वारा अप्रत्‍यक्ष रूप से महाशक्ति का बहिस्‍कार किया जा रहा था और इसकी छाप निश्चित रूप से चिट्ठाचर्चा पर दिखती है।” … पढना जारी रखे

चिट्ठाचर्चा, संजय तिवारी में प्रकाशित किया गया | 4 टिप्पणियाँ

इस चीख की आवाज को दोस्तो, हम सभी को सुनना होगा…

पूरी कहानी यहाँ पढ़ें चित्र – विजेन्द्र विज की कलाकृति

चिट्ठा चर्चा, रविरतलामी में प्रकाशित किया गया | टिप्पणी करे

हम बोलें भी तो क्या बोलें

चार दिनों तक, हिन्दी के मैं सम्मेलन में गया हुआ थाइसीलिये अब कार्य भार जो जुड़ा हुआ है, निपटाना हैचाहा तो था, समय किन्तु मिल सका नहीं कुछ भी पढ़ने काइसीलिये चर्चा में मुश्किल हुआ जरा भी लिख पाना हैनारद … पढना जारी रखे

चिट्ठा चर्चा, chithacharcha में प्रकाशित किया गया | 5 टिप्पणियाँ

भोज-भात और साधुवाद

हिन्दी ब्लागिंग में साधुवाद का युग बीत गया इसलिए मैं आतंकवादी बनना चाहता हूं. मुझे इस ढांढस से कोई फर्क नहीं पड़ता कि क्या साधुवाद का कोई युग होता है. मैं और मेरी चिट्ठाकारी अक्सर ये बाते करते हैं कि … पढना जारी रखे

संजय तिवारी में प्रकाशित किया गया | 3 टिप्पणियाँ