Monthly Archives: जून 2007

आइए, आज मालवी जाजम बिछाएं…

(मालवी जाजम के चिट्ठाकार – श्री नरहरि पटेल) भाई ई-स्वामी ने कोई दो साल पहले ख्वाहिश जाहिर की थी कि कोई मालवी चिट्ठा शुरू करवाई जाए… इधर कुछ समय से इक्का दुक्का मालवी चिट्ठे शुरु हुए हैं. देर से ही … पढना जारी रखे

चिट्ठा चर्चा, रविरतलामी, chithacharcha, chithha charcha में प्रकाशित किया गया | 5 टिप्पणियाँ

तीन साल की इगा का चिट्ठा

मासुमियत की दुनिया में, किलकारियों की गूँज के साथ आपका स्वागत है।…. तीन साल की इगा भी चिट्ठाकारी – हिन्दी चिट्ठाकारी में उतर चुकी हैं. ऊपर की पंक्ति उसके ब्लॉग का टैगलाइन है. उनके चिट्ठे का नाम है – मेरा … पढना जारी रखे

चिट्ठा चर्चा, रविरतलामी, chithha charcha में प्रकाशित किया गया | 3 टिप्पणियाँ

धन्यवाद-मैं पी लेता हूँ

आज मिल कर हम करें हर एक उसका धन्यावादकर गया जो टिप्पणी जाकर कहीं भी, धन्यवादतुमने सब बातें पढ़ीं हैं जो कि चिट्ठे पर लिखीलिख गये हो चार अक्षर, वक्त लेकर धन्यवादऔर जिनको आ नहीं पाया तनिक लिखना कभीइसलिये वे … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 3 टिप्पणियाँ

फुरसतिया टाईम्‍स न फुरफरिया टाईम्‍स- ये है चिट्ठाचर्चा टाईम्‍स

कृपया ध्‍यान दें कि किसी भी चर्चा की तरह ऊपर का मसाला लिंकों से लदा हुआ है, पूरे अखबार को माऊस से सहलाते हुए पढ़ें ताकि कोई लिंक छूट न जाए।अब भाई लोग तरस खाएं,क्‍योंकि पारा 45 से ऊपर है … पढना जारी रखे

चिट्ठाचर्चा, मसिजीवी, chitha charcha, ink blogging, masijeevi में प्रकाशित किया गया | 9 टिप्पणियाँ

एक अल्हड-अक्खड चिट्ठा चर्चा,, अन्धेरे में……

इस बार की चर्चा की प्रेरणा मुझे राकेश खंडेलवाल जी से प्राप्त हुई है । कई बार सोचा कि उनके अन्दाज़ में चर्चा करूँ सो आज अवसर लग ही गया 🙂वैसे इसके लिए वे अंगूठा नही मांगेंगे , इसका मुझे … पढना जारी रखे

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मैं भी इक दिन गीत लिखूँगा

आज विचार आया कि उल्टा चला जाये. जो सबसे बाद में पोस्ट किया है उसे पहले कवर करें. वजह साफ है. हम तो चिट्ठों की संख्या देखकर ही डर गये और सोचा कि चुप मार कर बैठ जाते हैं. उससे … पढना जारी रखे

उड़न तश्तरी, chitha charcha, chithacharcha, sameer lal में प्रकाशित किया गया | 11 टिप्पणियाँ

हम अपनी उस खुदकुशी का मातम

वो न मिलें तो है दम निकलता, मिलें तो खुशोय्यों से जान जातीहम अपनी इस खुदकुशी का मातम, सजा के चिट्ठे में लिख रहे हैं कभी तो कविता भटक गई है, मिली अगर तो वो टूटी फ़ूटी बिठा तश्तरी उसे … पढना जारी रखे

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