Monthly Archives: अप्रैल 2007

जी का जंजाल मोरा बाजरा….जब मैं बैठी बाजरा सुखाने…

जब जनसत्ता वाले हमें छाप रहे थे हम पहाडों की हवा खा रहे थे। यहाँ दिल्ली की गर्मी मे हमारा कंपूटर बाबा प्राण त्याग गया । वापस आकर देखा तो समस्या गम्भीर थी। खैर जैसे तैसे कल शाम इन्हे जिला … पढना जारी रखे

चिट्ठा चर्चा, चिट्ठाचर्चा, chithacharcha, notepad में प्रकाशित किया गया | 9 टिप्पणियाँ

झुकना हमें भी गवारा नहीं है

वहसीयत कहें, दीवानापन कहें कि पागलपन!! बिना किसी बात के, बिना किसी खता के निर्दोष ३३ लोग मौत के घाट उतार दिये जाते हैं और सब हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं मजबूर. न जाने क्या क्या सपने रहे … पढना जारी रखे

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पत्थर को भी जीने का विश्वास

कहता कैलेन्डर बसन्त है, पर मौसम देता है धोखेबाहर चलते तेज हवा के साठ मील की गति के झोंकेतापमान चालीस अंश फ़हरनहाईट पर रुका हुआ हैमौसम की इस मनमानी को रोक सके जो कोई, रोके आज यहाँ पर देखें कितने … पढना जारी रखे

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चिट्ठाकार कवि सम्मेलन

ये सच नहीं है कि चिट्ठापाठकों द्वारा और चिट्ठाचर्चा में भी कविताओं को तरजीह नहीं दी जाती. ये क्या – देखिए तो, आज चिट्ठाचर्चा में धुंआधार कवि सम्मेलन हो रहा है – अनहद नाद मां सब कुछ कर सकती है … पढना जारी रखे

चिट्ठाचर्चा, रविरतलामी, chithha charcha में प्रकाशित किया गया | 7 टिप्पणियाँ

मुग्‍धा नायिकाओं के देश में आइनों का व्‍यापारी

अक्‍सर देखने में आता है कि विवेक और उन्‍माद चिट्ठाजगत में बारी बारी से आते हैं, ओर देखो अनचाहे ही मोहल्‍ला जिसे ‘वी लव टू हेट’ ही इसे तय करने लगा है। नहीं नहीं ये नही कि वह जब कहता … पढना जारी रखे

चिट्ठाचर्चा, मसि‍जीवी, chithha charcha, masijeevi में प्रकाशित किया गया | 5 टिप्पणियाँ

ये सब देख सुन आंख रोने बिलखने लगी

हमेशा की तरह निठल्ले को कंधे में डाल हम चल पड़े नारद से मिलने, अचानक निठल्ले की आवाज आयी गुरूदेव आज चिट्ठाचर्चा ही करते चलो। हमें कहना पड़ा कि आज तो कर नही सकते, पिछली बार मुन्नाभाई, बापू और सर्किट … पढना जारी रखे

Tarun में प्रकाशित किया गया | 7 टिप्पणियाँ

हिन्दू मुस्लिम खुदा और भारत

यह खिलवाड़ है, जो कईयों के लिए खेल है. खिलाड़ी खेल रहे है अपना खेल. उकसा कर तमाशा देखना, फिर बदनाम करना. क्या बाहरी दुनियाँ क्या नेट-जगत, यही खिलवाड़ जारी है. क्या अब यह खिलवाड़ बन्द करेंगे? रवि रतलामी जी … पढना जारी रखे

चिट्ठाचर्चा, संजय, chithha charcha, sanjay bengani में प्रकाशित किया गया | 6 टिप्पणियाँ