कहाँ रहें राम?

सभी पाठकों को रामनवमीं की शुभकामनायें. इस अवसर पर संबंधित लेखन लेकर आये हमारे संजय भाई, कहते हैं हैप्पी बर्थ डे, रामजी, अभय तिवारी जी कहते हैं कहाँ रहें राम? और इसी अवसर पर यह भी खुब रही पर प्रयास अनुठे रामभक्त हनुमान के विषय में.

खैर, यह उत्सव तो पूरा हुआ, मगर दूसरा उत्सव, गीतकार का मुक्तक महोत्सव के रुकने से उड़न तश्तरी दुखी हो गई और पूछ रही है कि क्या भाई!! अकेला देख हड़काते हो? समर्थन में साथी टिप्पणियों के माध्यम से गीतकार जी को उत्सव नये फारमेट में फिर से शुरु करने की गुहार कर रहे हैं. इस पर गीतकार जी ने कहा- मुक्तक नहीं, एक प्रश्न और फिर गीत कलश पर हम किसको परिचित कह पाते :

हम अधरों पर छंद गीत के गज़लों के अशआर लिये हैं
स्वर न तुम्हारा मिला, इन्हें हम गाते भी तो कैसे गाते

अक्षर की कलियां चुन चुन कर पिरो रखी शब्दों की माला
भावों की कोमल अँगड़ाई से उसको सुरभित कर डाला
वनफूलों की मोहक छवियों वाली मलयज के टाँके से
पिघल रही पुरबा की मस्ती को पाँखुर पाँखुर में ढाला………………..

खैर, मुझे लगता है (वैसे तो मालूम है) कि कल से गीतकार जी रुका महोत्सव नये फार्मेट में फिर से शुरू होगा मगर उनका नैतिकता के आधार पर लिया गया निर्णय चिठ्ठा जगत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज किया जायेगा, यह मेरा विश्वास है.

माना सब इसी तरह के बनाये गये मानकों से सीखेंगे मगर यह भी तय है, बकौल अभिनव, कि ज़िन्दगी भी बहुत से दाँव सिखा देती है :


हर सबक कैद नहीं होता है किताबों में,
ज़िन्दगी भी बहुत से दाँव सिखा देती है।

वैसे भी अभिनव इतनी सुंदर कविता रचता है कि अगर वो लिखे और हम जिक्र न करें, यह संभव नहीं. लिखते तो और भी लोग बहुत प्यारा है और हम उन्हें पुनः न प्रस्तुत कर सुन सुना चुके हैं मगर भईया, मान जाओ, बिना कट पेस्ट के हम कोशिश कर भी उनके अंश नहीं पेश कर पाते, जैसे कि आज हिन्द युग्म पर :

आमचो बस्तर, किमचो सुन्दर थाराजीव रंजन

देश निकालामोहिन्दर कुमार

यह कवि महोदय, चर्चा के लिये अपनी साईट पर इन्हें कट एण्ड पेस्ट के लिये खुला छोड़ दें तो हम वहाँ से ले लेंगे. अच्छा बुरा जो लगे लगा करे, मगर यार, हम फिर से टाईप न कर पायेंगे…और जो हमसे इस उम्मीद को लगाये बैठे हैं वो खुद चर्चा लिखने के आग्रह से शरमाये बैठे हैं और आगे आते ही नहीं और गुनाहों पे लज्जत कि सलाह हजारों हैं.

आज बहुत अंतराल के बाद अनामदास को इत्मिनान से पढ़ा…बिना इसके मजा भी तो नहीं. वाकई आनन्द आ गया. नियती और कर्मठता को आंकता उनका आलेख काबिले तारिफ है, इसी को तौलते.. वो बताते है कि कैसे निबू खरीदकर वो पत्रकार बन गये, वाह भाई, ऐसी साफगोई तो शायद ही आगे भी देखने को मिले, पहले भी नहीं देखी.. बहुत खूब. उनको सुन, बेजी भी अपनी एक पुरानी रचना सुना रहीं हैं, जो कि एक पोस्ट होने की काबिलियत रखती है. बेजी से उम्मीद है कि वो इसे एक अलग पोस्ट के माध्यम से भी प्रेषित करें:

गुब्बारे में भरी हवा का भार क्या है ?
माँ की साँसो की गुनगुन का सुरताल क्या है ?
वो आँसू जो आँखों मे सूखा उसका माप क्या है ?
मिट्टी की सौंधी खुशबू का नाम क्या है ?
बुलबुले के जीवन का अर्थ क्या है ?
उसमें तैरते इन्द्रधनुष की जरूरत क्या है

चलो, अब बेजी की जो इच्छा हो मगर आजकल लावण्या जी बड़ी सक्रियता से लिख रही हैं: आज उन्होंने मानवता के बारे में लिखा और हमारे निठल्ला चिंतक ले कर बैठे है अपने द्वारा निर्मित शो..प्रेटी वूमेन …सृजनता और कल्पनाशीलता बहुत खूब है.

मगर उससे क्या होता है, यूँ तो सीमा जी भी निफ्ट की तस्वीरें दिन भर बदल बदल कर दिखाती रहीं और हमारे मनीष भाई, फैज की कल्पनाजगत की सैर कराते रहे मनीष भाई को बहुत बधाई, उनकी प्रस्तुति क्षमता अपने आप में अनोखी है और हम उसके कायल.

उपमा जैसे व्यंजन को मां के प्यार और मम्त्व से बांध देने का सफल प्रयास किया भाई रितेश ने और हमारी घघुती बसुती जी एक अलग अंदाज में अपनी दुख भरी दास्तां सुना रहीं हैं.

इन सब से बेखबर, हमारे प्रतीक भाई लाये हैं, लॉफ्टर चैलेंज वाली पारिजाद की तस्वीरें 🙂

अभी कोई जरुरी समाचार आ गया और मुझे जाना होगा….आना होगा में वादा करके संजय नहीं आये तो जाने में हम काहे शरमाये मगर जाते जाते एक जरुरी बात बता जायें:

तरकश हाटलाईन पर इस बार पेश हैं कटघरे में रवि रतलामी और साथ ही सुनिये उनकी पत्नी रेखा रतलामी से अंतरंग बातचीत.

मै संजय भाई से आग्रह करुंगा कि वो बचा और छुटा हुआ हिस्सा सुबह कवर कर लें..ताकि अगला चर्चाकर निश्चिंत हो उसका हिस्सा कवर करे.

About bhaikush

attractive,having a good smile
यह प्रविष्टि चिट्ठा चर्चा, समीर लाल, chithha charcha, sameer lal में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

3 Responses to कहाँ रहें राम?

  1. समीर जी,व्यंग्य में आप तो बहुत आगे निकल गये हो मियाँ। हरिशंकर परसाई होते तो उनको भी आपसे खतरा हो जाता। मैं निर्णायक-मंडली के किसी सदस्य को जानता तो सर्वश्रेष्ठ गरियायक के लिए आपका नाम सुझाता।बधाई हो!!!

  2. Manish कहते हैं:

    समीर जी बधाई का शुक्रिया ! वैसे फैज का कौन सा कलाम आपको पसंद आया ये भी बताते तो अच्छा लगता ।बहरहाल , आपके नाम फैज का ये शेर, कुबूल करें :)एक- एक करते हुए जाते हैं तारे रोशनमेरे मंजिल (चिट्ठे) की तरफ तेरे कदम आते हैंकुछ हमीं को नहीं अहसान उठाने का दिमागवो तो जब आते हैं माइल- ब- करम आते हैं

  3. miredmirage कहते हैं:

    आप तो चिट्ठा चर्चा को भी बहुत रोचक ढंग से प्रस्तुत करते हैं। घुघूती बासूती

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