आकस्मिक चर्चा

नमस्कार साथियों,
मै आपका मित्र जीतेन्द्र चौधरी फिर से हाजिर हूँ, चिट्ठा चर्चा करने के लिए। अरे आप लोग सोचेंगे ये फिर आ गये, अभी रविवार को तो इसके झेला था, फिर पकाएगा? अरे का करें अपने शुकुल महाराज जो ना कराएं सो कम। एक दिन बोले, तो शनिवार की चर्चा, रविवार की रात तक करते हो, ये बात अच्छी नही। हम बोले महाराज तो कोई उपाय सुझाइए, बोले जाओ, तुम्हारा दिन बदल दिया, अब तुम बुधवार के चिट्ठों की चर्चा, गुरुवार को किया करोगे, इसके साथ ही फरमान टिका दिया, बिना रसीदी टिकट के। उल्टा पुल्टा करके कई बार पढा, समझ मे नही आया, लेकिन वो जो चैट पर कहा था, उसी के अनुसार प्रस्तुत है बुधवार के चिट्ठों की चर्चा।

बुधवार दिनांक २१ फरवरी, २००७, के सारे चि्ट्ठे

जब आज सुबह-सुबह अखबार उठाकर देखा तो बहुत हैरान परेशान हुआ, लेखिका अरुंधती राय का मन हिंसक हो गया, पढकर दु:ख हुआ, अगले शुक्रवार को चाँद निकलने का इन्तज़ार करें और हाथ मे हरा फीता बाँधे और नारद पर जाकर दुआ करें, जल्द ही ठीक हो जाएंगीं। लेकिन श्री अरविंद के विचार पढकर भी निठारी बेहाल, सुलगते सवालनेताजी से जुड़े सवालों की आर पार की लड़ाई मे युद्द का आज तीसरा दिनसंजय भाई की टिप्पणी पाकर, आज फ़ूल उदास है, मेरा चाँद और शाम बहुत उदास है,अर्ध कुम्भ के दर्शन पाकर भी कबीरा तो रोन्दा ही रैंदा है। तो क्या हुआ प्रमेन्द् भाई, इन्तज़ार कैसा, आओ जिन्दगी पर बतिआते है। लेकिन इससे पहले अपनी समझ साफ़ करें मोहल्ले वाले, ये खलिश कहाँ से होती है, गुजरात प्रवास के दौरान भी नितिन भाई समझ नही सके। अखबार मे पढा कि ये कैसी कैसी बिमारियां है, कंही शादी के दौरान चन्द वाक्ये तो कंही एड्स की प्राकृतिक चिकित्साअमरीकन आइडल के एक भारतीय मूल के युवक ने एक जगह पढा कि देवीगढ मे मुलायम के एकलव्य, महंगाई पर तेजी से खाली होती जेब पर हैरान परॆशान है। एक तरफ़ रात, नींद, ख्वाब और गुलज़ार तो दूसरी तरफ़ ना विसाले यार होता जैसे खयाल, कहाँ निठारी का मातम और कहाँ हिन्दी फिल्म संगीत पुरस्कार का शोर। सच ही है, दुनिया विरोधाभास मे ही जीती है।

सुनील भाई कहते है कि

बहुत से लोग सोचते हैं कि हाथ की लिखाई से व्यक्ति के व्यक्तित्व के बारे में छुपी हुई बातों को आसानी से पहचाना जा सकता है. कुछ लोग तो यहाँ तक कहते हैं कि हाथ की लिखाई से वह बता सकते हैं कि कोई खूनी है या नहीं.

लोकमंच निठारी कांड सुलगते सवालों मे कहते है:

निठारी कांड को जिन प्रमुख कोणों से देखा जा रहा है उनमें नरभक्षण, वेश्यावृत्ति, पीडोपफीलिया जैसे मुद्दों पर तो लगातार बहस जारी है, मगर मानव अंग व्यापार का असल मामला जिन सबूतों के अभाव में गंभीरता से उठाया नहीं जा पा रहा, उसे अधिक देर तक दबाया नहीं जा सकेगा क्योंकि नोएडा के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. विनोद कुमार के मुताबिक बच्चों के शरीर के अंग जिस सधे और पेशेवर तरीके से काटे गये हैं उसमें अंग व्यापार की आशंका से कतई इंकार नहीं किया जा सकता है। साथ ही, इन कंकालों में गुर्दों, जिगर, पैंक्रियास, आंतों, आंखों आदि का न मिलना अंग व्यापार के मुद्दे को दबने कहां देंगे और जब यह मुद्दा उठेगा, तब यह सवाल भी उठेगा ही कि खूनी कोठी के ठीक पड़ोस में रहने वाले उस डाक्टर की कोठी की तलाशी पांच दिनों तक क्यों टाली गयी जो नोएडा के अवैध किडनी ट्रांसप्लांटेशन का आरोपी भी है।

इनके साथ रोजाना के जुगाड़ी लिंक हो है ही, इस बार रविशंकर का याहू पाइप्स पर तगड़ा तकनीकी लेख जरुर देखिएगा।

आज की कविता टू फेसेस के ब्लॉग से

आज शाम है बहुत उदास
केवल मैं हूँ अपने पास ।

दूर कहीं पर हास-विलास
दूर कहीं उत्सव-उल्लास
दूर छिटक कर कहीं खो गया
मेरा चिर-संचित विश्वास ।
-भगवती चरण वर्मा

अच्छा भाई, इक सप्ताह में आपने दो दो बार झेला, आपका धन्यवाद।

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3 Responses to आकस्मिक चर्चा

  1. Sagar Chand Nahar कहते हैं:

    भाई साहब हम तो तैयार हैं आपको रोज ही झेलने के लिये आप आओ तो सही।

  2. mahashakti कहते हैं:

    अच्‍छी चर्चा की जीतू भाईबोले तो मोजेदार 🙂

  3. अनूप शुक्ला कहते हैं:

    बढि़या है। कल चिट्ठे देख नहीं पाया। आज तुम्हारी चर्चा से देखा। बहुत सही!

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