कमलेश्वर : भावभीनी श्रृद्धांजलि

साथियों मै प्रस्तुत हूँ, शनिवार के चिट्ठों अर्थात दिनांक २७ जनवरी के चिट्ठों की चर्चा लेकर। आप लोग तैयार है ना?

आगे बढने से पहले, एक दु:खद समाचार, हिन्दी के जाने माने साहित्यकार कमलेश्वर जी आज हमारे बीच नही रहे। कमलेश्वर जी का शनिवार की रात साढ़े आठ बजे हृदय गति रुक जाने के कारण निधन हो गया। वे ७५ वर्ष के थे। कमलेश्वर जी के निधन से हिन्दी साहित्य, फिल्म, टेलीविजन और पत्रकारिता को अपूरणीय क्षति हुई है। मै हिन्दी चिट्ठाकरों की तरफ़ से उन्हे भावभीनी श्रृद्धांजलि अर्पित करता हूँ। हिन्दी ब्लॉगर ने अपने ब्लॉग देश दुनिया मे कमलेश्वर जी को श्रृद्धांजलि अर्पित करते हुए लिखा है :

कमलेश्वर जी संभवत: भारत के एकमात्र साहित्यकार थे जिन्हें विशुद्ध साहित्य और फ़िल्म, दोनों ही क्षेत्रों में पूरी सफलता मिली. साथ ही पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उन्होंने महती काम किया था.कमलेश्वर जी ने अपनी रचनाओं में कस्बाई और महानगरीय ज़िंदगी, दोनों ही को बहुत बारीकी से उतारा है.

आज की सबसे धमाकेदार पोस्ट रही हिन्द, हिंदी और हिन्दुस्तानी, ईस्वामी द्वारा लिखे गए इस विचारोत्तेजक लेख में ईस्वामी ने कुछ बुनियादी सवाल उठाएं है। इस बारे मे आप वहीं पर पढिए तो ज्यादा मजा आएगा, ईस्वामी कहते है :

मैं मन ही मन सोचता हूं की यार काश भाषा-प्रेम का ऐसा जज़्बा हमारे देसियों मे होता तो मेरे ब्लाग पर कितनी अधिक हिट्स पडतीं!

साथ ही ईस्वामी जी ने नास्डेक पर फहराए तिरंगे पर भी एक विशिष्ठ नज़रिया पेश किया है, ईस्वामी कहते है:

मुझे क्यों लगता है की ये भारत की सफ़लता नहीं है, ये अमरीका की सफ़लता है. भारत का कोई भय नहीं है, उस से कोई स्पर्धा नहीं है वो पालतू हो गया है – जैसे कोई निरीह नवयौवना किसी ड्रैकुला से खून चूसवाने को अपनी गर्दन आगे बढा दे! और निश्चिंत ड्रैकुला दांत गडाते हुए कहे “आज तुम्हारी ड्रेस खूबसूरत लग रही है”! नवयौवना बोले “थेंक्यू” … बिल्कुल वैसा मामला है – अपने बाज़ारों पर जैसे पकड हो रही है उप्पर वाला ही मालिक है,बीच में तो बॉम्बे स्टाक एक्सचेंज में नेस्डेक और एनवाईएसई द्वारा निवेश करने की खबरें उड रहीं थी! इनकी असली स्पर्धा तो है संयुक्त यूरोप से, चीन से. उधर किसानों की आत्महत्याएं और त्सुनामी प्रभावित नाविकों के किडनी बेचने की खबरें कहां और कहां न्यूयार्क के चौराहे पर तिरंगा! इस से बडी विसंगती नहीं हो सकती!

तरुण ने अनुराग द्वारा आयोजित वर्जीनिया रेडियो पर प्रसारित हिन्दी ब्लॉगिंग वार्ता के अंश अपने ब्लॉग पर पेश किए है जरुर देखिएगा/सुनिएगा। साथ ही वे बता रहे है उत्तरांचल के चार सपूतों को पद्मश्री पुरस्कार दिया जा रहा है। भोला जो बहुत काफी दिनो बाद, कहा जाए तो अपनी दूसरी पारी की चिट्ठाकारी मे सक्रिय हुए है, आजकल अपने पसंदीदा विषय क्रिकेट को छोड़कर तकनीकी ज्ञान बाँटने मे लगे हुए है, आज वे पिकासा चलचित्र मैनेजर के बारे मे बता रहे है। नारायण अंग्रेजी फिल्म वार आफ द वर्ल्ड के समीक्षा लिख रहे है। लोकमंच पर बिहार के किसानों की बात करते हुए लिखा गया है :

बिहार के किसान परिवारों की स्थिति प्रेमचंद के उपन्यास ‘गोदान’ के होरी परिवार जैसी है। होरी किसानी करता है और उसका बेटा गोबर शहर में मजदूरी करता है। अभी बिहार में भी बुजुर्ग किसानी कर रहे हैं और युवा वर्ग बाहर जाकर मजदूरी कर रहा है या नौकरी। यह विस्थापन कुशल एवं अकुशल दोनों प्रकार के मजदूरों का हो रहा है। यही प्रवृत्ति इन्हें बचाए हुए है। राज्य सरकार की अकर्मण्यता की वजह से पलायन की प्रकृति और तेज हो गई है। कृषि एवं गांव की खराब स्थिति इसे और बढ़ा रही है। इस प्रकार बिहार में किसानों का जो मर्ज है वही उनके लिए दवा बन गयी है।

सुनील भाई २६ जनवरी पर स्वतंत्र पत्रकारिता पर अपने लेख ‘विचारों की आजादी’ मे लिखते है:

आजकल सरकारी सेंसरशिप का नया काम है अंतर्जाल पर पहरे लगाना ताकि लोगों की पढ़ने और लिखने की आज़ादी पर रोक लगे. सीविप इन देशों को “काले खड्डे” (Black holes) का नाम देती है और इनमें सबसे पहले स्थान पर है चीन, जहाँ कहते हैं कि 30,000 लोग सरकारी सेसरशिप विभाग में अंतर्जाल को काबू में रखने का काम करते हैं. कहते हें कि चीन में अगर आप किसी बहस के फोरम या चिट्ठे पर कुछ ऐसा लिखे जिससे सरकार सहमत नहीं है तो एक घंटे के अंदर उसे हटा हुआ पायेंगे. जिन अंतर्जाल स्थलों को चीन में नहीं देख सकते उनमें वीकीपीडिया भी है.

स्वागत और तारीफ़ करिए, नवोदित चिट्ठाकार सुरेश चिपलूकर अपने चिट्ठे, अनगढ कच्चा चिट्ठा, को लेकर प्रस्तुत हुए है। साथ ही कैलकूलेटर लेकर तैयार हो जाइए, क्योंकि सागर चंद नाहर संयुक्त परिवार पेचीदे रिश्तों की खिचड़ी पर एक लेख लेकर प्रस्तुत है। रचनाकार मे प्रस्तुत है राजकुमारी श्रीवास्तव की कहानी साहसी राजन । गिरिन्द्र झा मीडिया के अन्दर की बात बता रहे है, चुपचाप सुनिए।

आने वाले बजट के बारे मे जगदीश भाटिया का जानकारी पूर्ण लेख पढिए, फुरसतिया जी के ब्लॉग पर पढिए परसाई जी का एक प्रसिद्द व्यंग लेख पहिला सफेद बाल । आशीष द्वारा, ब्रम्हाण्ड की विस्मित कर देने वाली सस्वीरों और जानकारी के साथ पढिए, ब्रम्हाण्ड मे एक समुद्री बीच। मोहल्ला मे पढिए एक पत्र पागलखाने से, प्रस्तुत है इस लेख की कविता एक अंश : ( टंकण मे हुई अशुद्दिया खलती है)

ये दीवारें इतनी ख़ाली क्‍यों हैं?
न कोई दर्पण, न चित्र, न ही धब्‍बे
बच्‍चों के हाथों के निशान तक नहीं
केवल डरावनी सफेदी

आज की टिप्पणी : सृजनशिल्पी द्वारा, देश दुनिया पर

कमलेश्वर जी के निधन से हिन्दी साहित्य, फिल्म, टेलीविजन और पत्रकारिता को अपूरणीय क्षति हुई है। वह इस दुनिया को छोड़ कर चले गए हैं लेकिन अपनी रचनाओं में वह जो अपनी अमिट छाप कर गए हैं उससे पाठकों को हमेशा नया सोचने और समझने के लिए प्रेरणा मिलती रहेगी। परमपिता से हम दिवंगत आत्मा को परम मुक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं।

पिछले वर्ष इसी सप्ताह:
मसला ए रिहाइश, चौधरी साहब अपनी कुवैत की कहानी सुनाते सुनाते इस ब्लॉग को अनाथ करके, अचानक पता नही कहाँ, गुम हो गए, शायद आज चर्चा मेँ इनको उलाहना देने से इनकी अधूरी कहानी आगे बढे।

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9 Responses to कमलेश्वर : भावभीनी श्रृद्धांजलि

  1. Udan Tashtari कहते हैं:

    कमलेश्वर जी को हमारी भी भावभीनी श्रूद्धांजली.

  2. नितिन व्यास कहते हैं:

    कमलेश्वर जी और नैय्यर साहब को हमारी भी भावभीनी श्रध्दांजली. अनूपजी और ईस्वामीजी की हिन्दीनी साइट पिछले ३-४ दिनों से नहीं खुल रही है, शायद बाकी मित्रों को भी यही समस्या हो..ईस्वामीजी जरा ध्यान दें।

  3. Pankaj Bengani कहते हैं:

    कमलेश्वर जी और नैय्यर साहब को हमारी भी भावभीनी श्रध्दांजली. —————————–…पर एक लेख लेकर प्रस्तुत है। रचनाकार मे प्रस्तुत है राजकुमारी श्रीवास्तव की कहानी साहसी राजन ताऊ यहाँ लिंक गडबड है।

  4. Jitendra Chaudhary कहते हैं:

    मास्साब! लिंक दुरुस्तिया दिए गए है। इंगित कराने का धन्यवाद! अब देखें, कौनो और भूल-चूक हो तो बताया जाए।

  5. संजय बेंगाणी कहते हैं:

    कमलेश्वर जी और नैय्यर साहब को हमारी भी भावभीनी श्रध्दांजली. मेर अनुरोध है की टिप्पणी करना सरल रखे, वर्ड वेरिफिकेशन से कठीनाई होती है.

  6. अफ़लातून कहते हैं:

    हमें लगा था कि चिट्ठाचर्चा करने वाले साथी छुट्टी पर हैं,फिर लगा अनुरागजी के रेडियो कार्यक्रम में व्यस्त रहे होंगे,पाठक के नाते देबशीष से गुजारिश भी की।कल देबाशीष फिर प्रकट हुए तब तसल्ली हुई।

  7. आशीष कहते हैं:

    कमलेश्वर जी को मेरी हार्दिक श्रद्धांजली !हाल ही मे मैने उनकी कालजयी रचना “कितने पाकिस्तान’ पढी थी।वे एक जमीन से जुडे महान लेखक थे। वे अपनी रचनाओ के द्वारा हमेशा अमर रहेंगें।

  8. अनूप शुक्ला कहते हैं:

    हमें तो यही कहना है कि अपना चिट्ठाचर्चा का काम समय से किया करो। ये नहीं कि सुबह से हो कही शाम और आप कहें अरे भाई अभी तो बहुत पड़ा है काम!

  9. सागर चन्द नाहर कहते हैं:

    कमलेश्वर जी और ओ पी नैयर साहब को भावभीनी श्रद्धान्जली, दो दिनों में दो तेजस्वी तारे इस दुनियाँ से विदा हो गये।

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