Monthly Archives: नवम्बर 2006

मध्यान्हचर्चा दिनांक : 25-11-2006

धृतराष्ट्र अच्छे मूड में नहीं हैं. बेमन-से कोफी पी रहे हैं और संजय को देखे जा रहे हैं. संजय भी मूड को भाँप कर बीना कुछ बोले चुपचाप संजाल को टटोल रहे हैं. समय-सर चर्चा सुनने को न मिले तो … पढना जारी रखे

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प्रेम याने प्रेम याने प्रेम होता है

प्रस्तुत है आज की चिट्ठा चर्चा ज़रा संक्षिप्त रूप में। मुकेश बंसल कहते हैं कि हिंदी को अपनाने के मामले में हम दोहरे मापदंडों का इस्तेमाल करते रहे हैं, “हर पढ़ा-लिखा हिंदुस्तानी अपने बच्चों को अंग्रेजी स्कूल में डालना चाहता … पढना जारी रखे

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अपने सपनों को रखिये, अपनी मुठ्ठी में भरके

जगजीत-गुलज़ार आज वैसे तो चर्चा करने की अतुल का बारी है। लेकिन वो कल ही हमारे हिस्से की चर्चा छू के निकल लिये लिहाजा जुमे की नमाज हमें पढ़नी पड़ेगी। हम खुशी-खुशी इसके लिये अपना माउस और की बोर्ड पोछ … पढना जारी रखे

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आज के चिठ्ठे

सायबर कैफे कैसे चलाया जाये इस बारे में कुछ हाट टिप्स को ओपेन सोर्स कर रहे हैं भुवनेश। कयह वाली तो न सिर्फ बिजनेस चलायेगी बल्कि चिठ्ठाकारी के जंगल में आग लगा देगी। ग्राहकों को ब्लॉगिंग के बारे में बताएं … पढना जारी रखे

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मध्यान्हचर्चा दिनांक : 22-11-2006

धृतराष्ट्र कुर्सी पर पसरे हुए हैं. एक हाथसे पेपरवेट घुमा रहे हैं, दुसरे में उनकी पहचान बन गए कोफी कप को थामे हुए हैं. संजय अपनी नज़रे कमप्युटर स्क्रीन पर गडाये हुए, नारदजी का आह्वान कर रहे है. तभी धुं-धुं … पढना जारी रखे

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पानखर नी प्रितडी [गुजराती चिट्ठे]

आज युँही बैठा था तभी गुज्जु काका आ गये।गुज्जु काका : शुं छे? मजा मां?मैं: अरे काका, किधर चले गए थे आप?गुज्जु काका : यु.एस. और कहाँ! गुजराती नो एक पग यहाँ ने दुसरा पग …… सी…..धा……. यु.एस.।मैं: ह्म्म.. बराबर … पढना जारी रखे

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कृप्या टिप्पणियाँ करने दें

आज की यात्रा शुरु हुई तो अनूप भार्गव जी बड़े दुखी स्वर में मनुहारी गीत पेश कर रहे थे; तुम जब से रूठी होमेरे गीत अपना अर्थ खो बैठे हैंमेरे ही गीत मुझ से ही खफ़ा होमुझ से दूर जा … पढना जारी रखे

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