Monthly Archives: अगस्त 2005

जब जागो तब सबेरा

अनुनाद सिंह की सुभाषित-वर्षा में भीगते हुये अगर आपको कोई ऐसा दोस्त दिख जाये जो क्विकस्टार की बात शुरु कर दे तो भागने में ही आपकी भलाई है। भले ही आपको गुजरा जमाना याद हो लेकिन आप अपने ब्लाग का … पढना जारी रखे

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बदलाव तो होता ही है

सभ्यता के नशेड़ी: निठल्ला होंगे तो नशा लाजिमी है। अपने निठल्ले भी शिकार हो गये -नशे के। नशा है सभ्यता का। देखें शायद आप भी इसमें डूबना चाहें। बदलाव तो होता ही है: यात्रा में कुछ तो बदलेगा ही लगता … पढना जारी रखे

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अपना-अपना धंधा है

अपना-अपना धंधा है। भीख मांगना अगर पेशा है तो कुछ अंदाज भी पेशेवराना होगा ही। मजबूरी हो या अलाली भीख मांगने में भी कम मेहनत नहीं लगती। इसके आगे का सच जानने की उत्सुकता है तो सुनीलजी के ब्लाग तक … पढना जारी रखे

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ऐसी आजादी और कहां?

ऐसी आजादी और कहां?: जो मिल जाता है वह नाकाफी लगता है। रवि रतलामी आजादी की ५९वीं वर्षगांठ पर पूछते हैं क्या ये सचमुच आजाद हैं। गीत बनाओ सुर मिलाओ: रमण कौल का मन है कि भारत की हर भाषा … पढना जारी रखे

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आजादी का घालमेल

आजादी का घालमेल: नीरज दीवान आज के भारतीय समाज तथा राजनीति के घालमेल को देखने की कोशिश कर रहे हैं। राजनीति की मंडी बड़ी नशीली हैइस मंडी ने सारी मदिरा पी ली है।

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उगता हुआ सूरज

मंगल पांडे-उगता हुआ सूरज: मंगल पांडे के बारे में तफसील से पढ़ें की बोर्ड के सिपाही में। अथः कालेज पुराणे संजय कथा: आशीष श्रीवास्तव के कालेजिएट किस्से सुनकर आप अपने को तलाशने लगेंगे कि इनमें मैं कहां हूं!

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कपड़े आपका परिचय देते हैं

आपके व्यक्तित्व की झलक देते हैं आपके कपड़े। कैसे? ये बता रहे हैं- प्रतीक। हैरी पाटर हवा हवाई है: हैरी पाटर आज का ‘आइकन’ है। इसका सच क्या है जानने की कोशिश की गयी है । सवाल-जवाब भी दिलचस्प हैं।

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